माना तूने आना देखा,
तू ही है जिसने जाना देखा
तेरे कुछ लम्हो की खातिर
देख यहाँ हर शख्श लड़ा है
ए वक्त तू क्यूँ खामोश खड़ा है|
जिंदगी उलझनोंमें फसती जाती
उम्र हरपल है बढाती जाती
तू है के बस रुका पड़ा है
ए वक्त तू क्यूँ खामोश खड़ा है|
महसूस हो वो पल कहाँ है
जो कल था वो आज कहाँ है
यादों की उन गेहराइओ में
मेरा कुछ सामान पड़ा है
ए वक्त तू क्यूँ खामोश खड़ा है|
- किरन चावड़ा
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